- कुचामनी ख्याल राजस्थान के नागौर से निकला है इस ख्याल की परंपरा लगभग 125 साल पुरानी है।
- कुचामनी ख्याल का प्रवर्तन प्रसिद्ध लोक नाट्यकार लच्छीराम ने किया था।
- ख्याल परंपरा में लच्छीराम जी ने इस शैली का समावेश किया और लगभग 30 ख्यालों की रचना की।
- लच्छीराम जी के बारे में एक और प्रसिद्ध बात है कि वे उन गिने चुने व्यक्तियों में शुमार है जो दोनों हाथों से लिख सकते हैं।
कुचामनी ख्याल की विशेषताएं
- यह ख्याल ओपेरा जैसा होता है जिसमें संगीत और नाच साथ साथ चलता है।
- इसमें लोकगीतों की प्रधानता रहती है और सामाजिक व्यंग्य पर आधारित विषयों का चयन नाटक के लिए किया जाता है।
- इन ख्यालों की भाषा सरल होती है जो आम बोलचाल में प्रयुक्त होती है।
- कुचामनी ख्याल का प्रदर्शन खुले मंचो पर किया जाता है और इसमें स्त्रियां भाग नहीं लेती स्त्री चरित्रों का अभिनय भी पुरुष पात्रों द्वारा किया जाता है।
- ख्याल में संगत के लिए ढोल वादक शहनाई वादक ढोलक व सारंगी वादक मुख्य सहयोगी होते है।
मास्टर लच्छीराम द्वारा रचित कुचामनी ख्याल
लच्छीराम द्वारा रचित ख्यालों में चांद नीलगिरी, राव रिडमल, गोगा चौहान, नौटंकी शहजादा, मीरा मंगल, विक्रमादित्य, बुलिया भटियारीन, राजा चंदरसेन, भक्त प्रहलाद, सेठ सेठानी, निहालदे सुल्तान, भक्त पूरणमल, आमलदे और जगदेव कंकाली प्रमुख है।
लच्छीराम के अलावा कुचामनी ख्याल के अन्य लेखक
कुचामनी ख्याल के अन्य मुख्य लेखकों में लच्छीराम खोजी जो पंडित लच्छीराम के ही शिष्य थे और इनके अलावा नत्थू दर्जी, गणपत ब्राह्मण, विप्र झाल, गोविंदराम गौड़, धन्नालाल, भरू बगस, अंबालाल, नंदलाल, बलदेव, छाजूलाल, सुखलाल, रत्ना खाती प्रमुख है।
कुचामनी ख्याल के प्रमुख कलाकार या खिलाड़ी
इस ख्याल के प्रमुख खिलाड़ियों में कासम, मगराज, फकीर दौलतराम, बंशीलाल खिलाड़ी, लच्छीराम और उगमराज है।
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